यदि आपके पास समय की कमी है, और आप चुस्त दुरुस्त रहने का कोई नुस्ख़ा ढूँढ रहे हैं, 
तो सूर्य नमस्कार उसका सबसे अच्छा विकल्प है। सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है।

 

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रितेश है, सूर्य नमस्कार कैसे करें? सूर्य नमस्कार का संरेखण क्या है। सूर्य नमस्कार के लाभ क्या हैं? आज हम सभी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करेंगे

 

सूर्य नमस्कार का अर्थ है सूरज को अर्पन या नमस्कार करना। सूर्य नमस्कार से रोजाना दिन की शुरूआत करने पर आपका तन और मन दोनों ही स्वस्थ रहते हैं। इसे करते समय सूरज की किरणों का सीधा प्रभाव शरीर पर पड़ने से आपके कई रोग भी दूर हो जाते हैं।

 

सूर्य नमस्कार करने से शरीर को उचित मात्रा में विटामिन डी मिलता है, जिससे कि आप मानसिक तनाव और मोटापा जैसी समस्या को भी दूर कर सकते हैं। रोज 5-10 मिनट सूर्य नमस्कार करने के बाद आपको कोई आसन करने की भी आवश्यकता नहीं होगी। 

 

तो चलिए जानते है रोजाना सूर्य नमस्कार करने से आप किन किन बीमारियों को दूर करके स्वस्थ रह सकते हैं।

 

सूर्य नमस्कार १२ शक्तिशाली योग आसनों का एक समन्वय है, 

जो एक उत्तम कार्डियो-वॅस्क्युलर व्यायाम भी है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

 

सूर्य नमस्कार के द्वारा त्वचा रोग समाप्त हो जाते हैं अथवा इनके होने की संभावना समाप्त हो जाती है। इस अभ्यास से कब्ज आदि पेट रोग समाप्त हो जाते हैं और पाचन तंत्र की क्रियाशीलता में वृद्धि हो जाती है।   

 

इस अभ्यास के द्वारा हमारे शरीर की छोटी-बड़ी सभी नस-नाडि़यां क्रियाशील हो जाती हैं, 

इसलिए आलस्य, अतिनिद्रा आदि विकार दूर हो जाते हैं। 

 

सूर्य नमस्कार की उपरोक्त बारह स्थितियाँ हमारे शरीर को संपूर्ण अंगों की विकृतियों को दूर करके निरोग बना देती हैं। यह पूरी प्रक्रिया अत्यधिक लाभकारी है। इसके अभ्यासी के हाथों-पैरों के दर्द दूर होकर उनमें सबलता आ जाती है। गर्दन, फेफड़े तथा पसलियों की मांसपेशियां सशक्त हो जाती हैं, शरीर की फालतू चर्बी कम होकर शरीर हल्का-फुल्का हो जाता है।

यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। 'सूर्य नमस्कार' स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

सूर्य नमस्कार प्रातःकाल खाली पेट करना उचित होता है।

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।

आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

(जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।

 

आइए अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए सूर्य नमस्कार के इन सरल और प्रभावी आसनों को आरंभ करें। सूर्य नमस्कार का अभ्यास बारह स्थितियों में किया जाता है, जो निम्नलिखित है-

 

1) प्रणाम आसन |

दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों।गर्दन तनी हुई व दृष्टि सामने हो  नेत्र बंद करें। ध्यान 'आज्ञा चक्र' पर केंद्रित करके 'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ मित्राय नमः' मंत्र के द्वारा करें

 

(2)     हस्तउत्तानासन | 

    श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। ध्यान को गर्दन के पीछे 'विशुद्धि चक्र' पर केन्द्रित  करके 'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ रवये नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

(3) हस्तपाद आसन | 

तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे 'मणिपूरक चक्र' पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। 'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ सूर्याय नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।

 

(4) अश्व संचालन आसन | 

इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को 'स्वाधिष्ठान' अथवा 'विशुद्धि चक्र' पर ले जाएँ। मुखाकृति सामान्य रखें।'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ भानवे नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

 

(5) पर्वत आसन | 

श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान 'सहस्रार चक्र' पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें। सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ खगाय नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

 

(6) अष्टांग नमस्कार | 

श्वास भरते हुए शरीर को पृथ्वी के समानांतर, सीधा साष्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा पृथ्वी पर लगा दें। नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठा दें। श्वास छोड़ दें। ध्यान को 'अनाहत चक्र' पर टिका दें। श्वास की गति सामान्य करें।'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ पूष्णे नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

 

(7) भुजंग आसन |

इस स्थिति में धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। मूलाधार को खींचकर वहीं ध्यान को टिका दें।'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

 

 

(8) पर्वत आसन |

श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान 'सहस्रार चक्र' पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें। 'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ मरीचये नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

(9) अश्वसंचालन आसन | 

इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को 'स्वाधिष्ठान' अथवा 'विशुद्धि चक्र' पर ले जाएँ। मुखाकृति सामान्य रखें। 'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ आदित्याय नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

(10) हस्तपाद आसन | 

तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे 'मणिपूरक चक्र' पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ सवित्रे नमः।' मंत्र के द्वारा करें

हस्तउत्थान आसन |

(11) श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। ध्यान को गर्दन के पीछे 'विशुद्धि चक्र' पर केन्द्रित करें।'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ अर्काय नमः।' मंत्र के द्वारा करें

 

(12) प्रणाम आसन | 

दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों।'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ भास्कराय नमः।' मंत्र के द्वारा करें

अच्छे स्वास्थ्य के अतिरिक्त सूर्य नमस्कार धरती पर जीवन के संरक्षण के लिए हमें सूर्य के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर भी देता है। 

 

१२ सूर्य नमस्कार को करने पश्चात योग निद्रा में पूर्ण विश्राम अवश्य करें। आप पाएँगे कि यह आपके चुस्त दुरुस्त, प्रसन्न और शांत रहने का मंत्र बन गया है; एक मंत्र जिस का प्रभाव दिन भर आप के साथ रहेगा I सूर्य नमस्कार — एक पूर्ण यौगिक व्यायाम।

 

मेरी वीडियो देखने के लिए धन्यवाद। मुस्कुराते रहो। अपना ख्याल रखें। नमस्ते